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पायलट बोले- पेपर लीक के पीछे बड़े माफिया और संगठित गिरोह

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पायलट बोले- पेपर लीक के पीछे बड़े माफिया और संगठित गिरोह

नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद छात्र प्रदीप माहिच आत्महत्या मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट रविवार को झुंझुनूं जिले के गुढ़ा बावनी पंचायत की कनिका की ढाणी पहुंचे, जहां उन्होंने छात्र प्रदीप माहिच के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। इस दौरान सांसद बृजेन्द्र ओला सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। गौरतलब है कि सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे प्रदीप माहिच ने कथित पेपर लीक प्रकरण से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले राहुल गांधी भी फोन पर परिवार से बात कर चुके हैं।परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में सचिन पायलट ने कहा कि एक गरीब परिवार के युवा का इस तरह आत्महत्या करना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज की दुखद है। उन्होंने कहा कि प्रदीप के पिता ने मजदूरी कर, जमीन बेचकर और लाखों रुपये का कर्ज लेकर बेटे की पढ़ाई और कोचिंग करवाई थी, ताकि वह परीक्षा पास कर परिवार का भविष्य संवार सके। लेकिन पेपर लीक प्रकरण ने उसके सपनों और व्यवस्था पर विश्वास को तोड़ दिया। पायलट ने कहा कि परिजनों ने उन्हें लिखित रूप से जानकारी दी है कि घटना के बाद प्रशासन और पुलिस का व्यवहार संवेदनशील नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि दुख की घड़ी में परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरे प्रदेश और देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर युवाओं का भविष्य किस दिशा में जा रहा है और शिक्षा व्यवस्था कितनी सुरक्षित है।सचिन पायलट ने कहा कि नीट पेपर लीक कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि यह करोड़ों रुपये के संगठित नेटवर्क और माफिया से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि 22 लाख से अधिक छात्र इससे प्रभावित हुए हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल कुछ छात्रों की गलती नहीं बल्कि बड़े स्तर पर चल रहे भ्रष्ट तंत्र का परिणाम हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े कोचिंग नेटवर्क और संगठित गिरोह इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि गांव का साधारण छात्र लाखों रुपये देकर पेपर नहीं खरीद सकता, इसलिए इस पूरे मामले में बड़े लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए पायलट ने सवाल उठाया कि जब पहली बार पेपर लीक की जानकारी सामने आई थी, तब तत्काल एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।उन्होंने कहा कि पेपर लीक का खुलासा किसी एजेंसी ने नहीं किया, बल्कि छात्रों की शिकायतों के बाद मामला सामने आया। जब छात्रों ने बताया कि कथित गेस पेपर और वास्तविक प्रश्नपत्र में समानता है, तब सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी।पायलट ने आरोप लगाया कि यदि छात्रों ने आवाज नहीं उठाई होती तो मामला दबा दिया जाता। उन्होंने यह भी पूछा कि जब एनटीए ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को सचेत किया था, तब कार्रवाई में देरी क्यों हुई।सचिन पायलट ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने के बावजूद अब तक किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जिस विभाग में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, उसके मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि हर साल पेपर लीक होंगे और युवाओं का भविष्य दांव पर लगेगा तो सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर जिम्मेदार कौन है।पायलट ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार दोनों इस मामले में पूरी सच्चाई सामने लाने से बच रही हैं। उन्होंने कहा कि जब शुरुआती दौर में कई संदिग्ध लोग पकड़े गए थे, तब भी समय पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि किसी बड़े नेटवर्क या प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हुई और किसके दबाव में निर्णय लिए गए।सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहले ही परिवार से मुलाकात कर चुके हैं और संगठन की ओर से आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।पायलट ने कहा कि कांग्रेस संगठन की ओर से परिवार को 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी परिवार के साथ खड़ी है और भविष्य में भी हरसंभव मदद की जाएगी।पायलट ने कहा कि पेपर लीक केवल कानूनी अपराध नहीं बल्कि युवाओं के सपनों की हत्या है। 

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