राजस्थान में पेट्रोल-डीजल हो सकता है सस्ता
राजस्थान समेत पूरे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा है... आपको बता दे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आने के कारण देश में ईंधन के दाम लगातार बढ़ गए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल में 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की नई बढ़ोतरी की जिससे पिछले 11 दिनों में चौथी बार पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ और इस दौरान पेट्रोल करीब 7.50 रुपए और डीजल लगभग 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हुआ बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे आम जनता की जेब, व्यापार, परिवहन और महंगाई पर दिखाई दिया। राजधानी जयपुर में पेट्रोल की कीमत 112.66 रुपए और डीजल 97.78 रुपए प्रति लीटर तक है, जिससे वाहन चालकों और मध्यम वर्ग की मुश्किलें बढ़ गयी... आर्थिक विशेषज्ञों और पेट्रोलियम विश्लेषकों का मानना है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की लागत नहीं, बल्कि उस पर लगने वाला भारी टैक्स है। वही भारत में बिकने वाले ईंधन की कुल कीमत का करीब 35 से 50 फीसदी हिस्सा टैक्स के तौर पर केंद्र और राज्य सरकारों के पास जाता है। एक्सपर्ट्स मानते है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर टैक्स ढांचे में सिर्फ 30 फीसदी तक कटौती कर दें, तो राजस्थान में पेट्रोल-डीजल 14 से 15 रुपए प्रति लीटर तक सस्ता हो जायेगा। वही वर्तमान में पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारें वैट व अन्य सेस वसूलती हैं, जिससे ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई हैं। अगर राजधानी दिल्ली की बात करे तो एक लीटर पेट्रोल की मूल लागत, जिसमें कच्चा तेल, रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन शामिल है, करीब 56 रुपए तक है। इसकेअलावा केंद्र सरकार लगभग 22 रुपए एक्साइज ड्यूटी के रूप में वसूल करती है। वहीं राज्य सरकार की बात की जाये तो राज्य सरकार वैट और स्थानीय सेस के रूप में औसतन 20 रुपए तक का टैक्स जोड़ती हैं। इसके अलावा पेट्रोल पंप डीलर को करीब 4 रुपए प्रति लीटर कमीशन मिलता है। यानी 56 रुपए का मूल तेल आम आदमी तक पहुंचते-पहुंचते 102 रुपए से ऊपर हो जाता है। वही राजस्थान में वैट अधिक होने के कारण यही कीमत 112 रुपए तक पहुंच रही है। वही विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स दरें अलग होने की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला है। राजस्थान उन राज्यों में शामिल है जहां वैट दरें अपेक्षाकृत ज्यादा हैं। बस यही वजह है कि यहां ईंधन अन्य कई राज्यों की तुलना में ज्यादा महंगा बिकता है। लगातार बढ़ते दामों का असर ट्रांसपोर्टेशन लागत पर पड़ रहा है, जिसके कारण फल-सब्जियों, राशन, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। जानकार मानते है कि यदि सरकारें टैक्स में कटौती करती हैं तो न केवल पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा, बल्कि महंगाई पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। जिससे आम जनता को सीधी राहत मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। फिलहाल बढ़ती कीमतों के बीच आम लोग राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि विशेषज्ञ लगातार टैक्स ढांचे में बदलाव की मांग कर रहे हैं।







