राजस्थान में प्रशासनिक तंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अनुशासित बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक बार फिर एक्शन मोड में आ गए है। मुख्यमंत्री ने लंबे समय से लंबित कुल 19 विभागीय जांच मामलों की विस्तृत समीक्षा कर उनका अंतिम निस्तारण किया है। जांच रिपोर्टों के आधार पर कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता के दोषी पाए गए 4 सेवारत अधिकारियों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही 7 अलग-अलग प्रकरणों में शामिल कुल 8 सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। इन अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में प्रमाणित पाए गए उसके बाद मुख्यमंत्री ने उनकी समानुपातिक पेंशन रोकने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवाकाल में की गई अनियमितताओं से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती, इसलिए कार्रवाई जारी रहेगी। इस कदम को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक सख्त और निर्णायक पहल बताया जा रहा है।
वहीं विभागीय दंड में संशोधन या राहत के लिए दायर पुनरावलोकन याचिकाओं पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कई मामलों में पूर्व में दिए गए दंड को यथावत रखते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया। केवल एक मामले में मानवीय आधार पर आंशिक संशोधन करते हुए दंड में थोड़ी राहत दी इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि सरकार हर मामले में साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर ही निर्णय ले रही है, न कि किसी दबाव में आकर
दूसरी तरफ जिन अधिकारियों के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके, उन्हें भी पूर्ण न्याय प्रदान किया गया है। एक वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया, जबकि दो अन्य मामलों में कुल 4 अधिकारियों को ससम्मान दोषमुक्त किया गया है। इससे उनके सेवा रिकॉर्ड पर लगा दाग पूरी तरह से मिट जायेग।
वही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस पूरी कार्रवाई को प्रशासन में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन इस फैसले के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमों में सख्ती और जवाबदेही को लेकर बड़ा संदेश गया है कि काम में लापरवाही, अनुशासनहीनता और नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दास्त नहीं की जाएगी।
