इंदौर। अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ, नई दिल्ली के आह्वान पर मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा प्रदेशभर में शिक्षकों की प्रस्तावित पात्रता परीक्षा के विरोध में आंदोलन तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हजारों शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार द्वारा अब उनके लिए पुनः पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने का निर्णय शिक्षकों के हित में नहीं है। संघ का कहना है कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और सेवा को नजरअंदाज कर परीक्षा के आधार पर उनकी योग्यता तय करना उचित नहीं है।संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि कोई शिक्षक इस परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है तो उसकी सेवा समाप्त करने जैसी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, जिससे शिक्षकों में भारी असंतोष है। उन्होंने इसे शिक्षकों के सम्मान और रोजगार की सुरक्षा के खिलाफ बताया।पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उन्हें बार-बार परीक्षा के दबाव में डालना उचित नहीं है। संघ ने सरकार से मांग की है कि पात्रता परीक्षा संबंधी आदेश को तत्काल वापस लिया जाए तथा शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे और उन्होंने एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
