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Patanjali Dalya Lab Test Failed: छतरपुर कोर्ट ने पतंजलि पर लगाया 3.40 लाख का जुर्माना

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Patanjali Dalya Lab Test Failed: छतरपुर कोर्ट ने पतंजलि पर लगाया 3.40 लाख का जुर्माना

छतरपुर: योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को मध्य प्रदेश के छतरपुर में बड़ा कानूनी झटका लगा है। छतरपुर के अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) एवं न्याय निर्णायक अधिकारी की अदालत ने पैकेटबंद दलिया के मामले में कंपनी समेत उसकी सप्लाई चेन से जुड़े सभी पक्षों को दोषी मानते हुए कुल 3 लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। मामला खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और उत्पाद को "मिसब्रांडेड" पाए जाने से जुड़ा है।

दरअसल, यह कार्रवाई नवंबर 2022 में लिए गए खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। जांच में पतंजलि का दलिया निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर पाया, जबकि उसी दौरान लिए गए दूसरे उत्पाद का नमूना मानक अनुरूप पाया गया था।

2022 में लिया गया था सैंपल

जानकारी के अनुसार, 17 नवंबर 2022 को छतरपुर के सागर रोड स्थित एक किराना दुकान पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान पैकेटबंद खाद्य उत्पादों के नमूने लिए गए और उन्हें जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया।

लैब रिपोर्ट में पतंजलि के 500 ग्राम पैक दलिया को "मिसब्रांडेड" घोषित किया गया। जांच में पाया गया कि पैकेट पर उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य पोषण संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं थी, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं डिस्प्ले) विनियम, 2020 के नियमों का उल्लंघन है।

पोषण संबंधी जानकारी छिपाने पर कार्रवाई

प्रयोगशाला रिपोर्ट के अनुसार, उत्पाद की पैकेजिंग पर न्यूट्रिशन संबंधी जानकारी प्रदर्शित नहीं की गई थी। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी पैक्ड फूड उत्पाद पर पोषण मूल्य की जानकारी देना अनिवार्य माना जाता है ताकि उपभोक्ता उत्पाद की गुणवत्ता और पोषण स्तर के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें।

अदालत ने माना कि यह उपभोक्ता अधिकारों और खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है, इसलिए संबंधित पक्षों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई जरूरी है।

कोर्ट ने खारिज की कंपनी की दलील

सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि जनवरी 2023 से दलिया जैसे उत्पादों को न्यूट्रिशन लेबलिंग संबंधी कुछ छूट प्रदान की गई थी। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि संबंधित नमूना नवंबर 2022 में लिया गया था, उस समय लागू नियमों के अनुसार पोषण संबंधी जानकारी देना अनिवार्य था। इसलिए बाद में मिली किसी छूट का लाभ इस मामले में नहीं दिया जा सकता।

किस पर कितना लगा जुर्माना

अदालत ने मामले में शामिल सभी स्तरों की जवाबदेही तय करते हुए अलग-अलग जुर्माना लगाया है—

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (निर्माता कंपनी) – ₹1,00,000
कंपनी के नामित अधिकारी (नॉमिनी) – ₹1,00,000
सप्लायर – ₹50,000
स्थानीय वितरक/कारोबारी – ₹50,000
खुदरा विक्रेता (दुकानदार) – ₹20,000-₹20,000

इस तरह कुल जुर्माने की राशि 3 लाख 40 हजार रुपए निर्धारित की गई है।

एक सप्ताह में जमा करनी होगी राशि

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और लेबलिंग संबंधी नियमों का पालन करना हर कंपनी की कानूनी जिम्मेदारी है। उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने सभी दोषी पक्षों को आदेश जारी कर एक सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि शासकीय कोष में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

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