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कथित धर्मांतरण मामले में खिरोड़ गांव गरमाया.

आपणो राजस्थान
कथित धर्मांतरण मामले में खिरोड़ गांव गरमाया.

झुंझुनूं के नवलगढ़ क्षेत्र के खिरोड़ गांव में कथित धर्मांतरण के आरोपों को लेकर माहौल गरमा गया है। विरोध में ग्रामीणों और व्यापारियों ने बाजार बंद रखकर प्रदर्शन किया और जय श्रीराम के जयकारों के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई। मामला अब पुलिस जांच तक पहुंच गया है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। नवलगढ़ के खिरोड़ गांव में बुधवार को कथित धर्मांतरण के आरोपों को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। खिरोड़ और आसपास के गांवों के लोगों ने बाजार बंद रखकर विरोध जताया। युवाओं, व्यापारियों और ग्रामीणों ने जय श्रीराम के जयकारों के साथ प्रदर्शन किया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में मेडिकल स्टोर संचालक अशोक रैगर और उसकी पत्नी सोनिया रैगर कमजोर तबके के लोगों को गुमराह कर धर्मांतरण गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये गतिविधियां सिर्फ खिरोड़ ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों तक फैली हुई हैं।दरअसल, 5 जून को सीकर जिले के गुंगारा गांव में कुछ परिवारों के कथित धर्मांतरण का मामला सामने आया था। आरोप है कि सुरेश नामक व्यक्ति की बेटी के जन्मदिन की आड़ में धार्मिक सभा आयोजित की गई थी। सूचना मिलने पर दादिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कई लोगों को हिरासत में लिया। महिलाओं को बाद में छोड़ दिया गया, जबकि पुरुषों से पूछताछ जारी बताई जा रही है।इधर, खिरोड़ में मंगलवार रात और बुधवार सुबह बालाजी मंदिर परिसर में ग्रामीणों की बैठकें हुईं। बैठक में लोगों ने दावा किया कि मुख्य आरोपी की पत्नी ने कई गांवों में प्रार्थना सभाएं आयोजित होने की बात स्वीकार की है। ग्रामीणों ने कथित रूप से प्रभावित परिवारों को समझाकर वापस हिंदू धर्म की मुख्यधारा में लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।ग्रामीणों का कहना है हम प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।हालांकि, बैठक में महिला ने बताया कि वह और उसका परिवार पारंपरिक रूप से माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। लेकिन कुछ समय से उन पर किसी अन्य धार्मिक मान्यता या प्रथा को मानने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सोनिया का कहना है हम तो माता लक्ष्मी को मानते हैं और उनकी बहुत भक्ति करते हैं। लेकिन हमें बार-बार कहा गया कि अगर तुम हमारी बात नहीं मानोगे, तो तुम्हारे ऊपर परेशानियां आ जाएंगी। हमें 'श्राप' (बददुआ) देने की धमकी भी दी गई।" सोनिया रैगर का कहना है कि वह और उनके पति वर्ष 2010 से प्रार्थना सभाओं में शामिल होते रहे हैं। उनका कहना है कि जालंधर में रहने के दौरान चर्च से संपर्क हुआ था और वर्तमान में हर रविवार को उनके घर पर प्रार्थना सभा आयोजित होती है, जिसमें कुछ परिवार शामिल होते हैं।फिलहाल, मामले को लेकर इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गोठड़ा थाना पुलिस तैनात रही। वहीं ग्रामीणों ने जिला पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। अब देखने वाली बात होगी कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस पूरे विवाद पर क्या कार्रवाई करता है।

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