तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक घमासान अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के दरवाजे तक पहुंच गया है। पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने रविवार को नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष के आवास पहुंचकर एक अर्जी सौंपी। वहीं तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी स्पीकर को पत्र लिखकर बागी सांसदों के किसी भी अलग गुट को मान्यता देने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की है।
स्पीकर को सौंपी गई अर्जी
लोकसभा अध्यक्ष के आवास से बाहर निकलने के बाद टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ और संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार किसी राजनीतिक दल के भीतर अलग गुट को मान्यता देने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से पहले ईमेल के जरिए अर्जी भेजी गई थी और अब उसकी हार्ड कॉपी भी स्पीकर कार्यालय में जमा कर दी गई है।
कीर्ति आजाद ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि लोकसभा अध्यक्ष संविधान और नियमों के अनुसार निष्पक्ष फैसला लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि "ममता बनर्जी ही पार्टी हैं" और पार्टी केवल सांसदों या विधायकों के समूह से नहीं, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत से खड़ी हुई है।
"अलग गुट बनाना संविधान के खिलाफ"
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी स्पीकर को सौंपे गए पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक अखंड राजनीतिक दल है और लोकसभा के भीतर उसका कोई अलग गुट नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार ऐसा कदम संविधान और संसदीय परंपराओं के खिलाफ होगा।
सागरिका घोष ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के चुनाव चिह्न के सहारे चुनाव जीतकर संसद पहुंचे, उनका पार्टी छोड़ने का फैसला नैतिक रूप से गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता सत्ता और राजनीतिक लाभ के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता कर रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी का स्पीकर को पत्र
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आग्रह किया कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को संसद में एकमात्र अधिकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए और किसी भी कथित अलग समूह या गुट को मान्यता न दी जाए।
अपने पत्र में उन्होंने मांग की कि यदि बागी सांसदों की ओर से किसी अलग गुट की मान्यता संबंधी कोई आवेदन प्राप्त होता है तो उस पर फैसला लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लंघन होता है तो पार्टी उचित कानूनी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखेगी।
TMC में बढ़ता जा रहा है संकट
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पिछले कुछ दिनों से गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। बागी सांसदों और नेताओं की गतिविधियों के बीच पार्टी नेतृत्व लगातार एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि उनके निर्णय का असर संसद में TMC की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।
